चिंता और डर सुखी जीवन के हैं बड़े अवरोध

बच्चों के लिए पैसा जमा करके छोड़ जाने की बजाय उन्हें धन कमाने की विद्या सिखाएं

अपनी प्राणशक्ति को प्रबल बनाए रखने के लिए प्रतिदिन प्राणायाम अवश्य किया करें

सभी प्रकार के नशे व्यक्ति के मन मस्तिष्क को खोखला बनाते हैं

नागपुर के कविवर्य सुरेश भट्ट प्रेक्षागृह में आज की शाम बनी अनूठे आध्यात्मिक संवाद की शाम

“जीवन में सुखी कैसे रहे” विषय पर दो हजार ज्ञान जिज्ञासुओं ने श्री सुधांशु जी महाराज से पाया मार्गदर्शन

Worry and fear are big barriers to a happy lifeनागपुर, ५ फरवरी। महाराष्ट्र की द्वितीय राजधानी कहे जाने वाले नागपुर महानगर के विशालकाय कविवर्य सुरेश भट्ट प्रेक्षागृह में आज संध्याकाल का दृश्य बेहद खास था। नगर महापालिका नागपुर द्वारा नवनिर्मित आडिटोरियम में मौजूद लगभग दो हजार स्त्री, पुरुषों एवं युवाओं को “जीवन में सुखी कैसे रहे” विषय पर सशक्त मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। मुख्य वक्ता थे – राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से आज मध्याह्नकाल पधारे विश्व जागृति मिशन के संस्थापक – संरक्षक आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज।

विषय पर व्याख्यान करते हुए श्रद्धेय श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि सुख की निजी व्याख्या लगभग हर व्यक्ति यह करता है कि जो उसे अच्छा लगे, जो खुद के अनुकूल पड़ता हो, जो उसके मन को रुचे; जो उसे पसन्द आए; वहीं सुख है। यह व्याख्या ठीक नहीं है। प्रायः देखा गया है कि लोग उनके पास जो उपलब्ध है वे उसका सुख नहीं उठा पाते। उल्टे जो उनके पास नहीं है उसके लिए वह दुःखी रहते हैं।

श्री सुधांशु जी महाराज ने परम पिता परमात्मा द्वारा प्रदत्त और उपलब्ध चीजों एवं सुविधाओं का लाभ उठाकर उनके सुख का अनुभव करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी वस्तु का सुख एक सीमा तक ही हो सकता है। मिष्ठान्न पसंद व्यक्ति भी एक सीमा तक ही किसी मिष्ठान्न के स्वाद का सुख उठा सकता है। गीतों के शौकीन आदमी को एक ही गीत बार – बार सुनाया जाय तो वह बुरी तरह ऊबने लगेगा। उन्होंने जीने का सलीका ठीक करने की सलाह सभी को दी। कहा कि जिस दिन हम अपनी कद्र करना सीख जाते हैं, ईश्वर उस पर मेहरबान होने लगता है। श्री सुधांशु जी महाराज ने उपस्थित व्यक्तियों का आह्वान किया कि वे बच्चों के लिए पैसा जमा करके छोड़ जाने की बजाय उन्हें धन कमाने की विद्या सिखाएं।

श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि चिन्ता और डर सुखी जीवन के सबसे बड़े अवरोध होते हैं। हमें अनावश्यक चिंता से बचना चाहिए, चिंता और चिता में कोई अन्तर नहीं। चिता मानव को एक बार जलाती है और चिंता उसे बार – बार जलाती है। कई बार अकारण डर व्यक्ति को असमय मृत्यु के द्वार पर लाकर खड़ा कर देता है। उन्होंने कहा कि सुखी जीवन के लिए अपने आहार, विहार, दिनचर्या आदि को व्यवस्थित करना पड़ता है। कहा कि प्राणशक्ति को प्रबल बनाए रखने के लिए प्रतिदिन प्राणायाम अवश्य किया करें। उन्होंने कहा कि निरोगी काया, घर में संपन्नता, संस्कारी सन्तान, समाज में प्रभाव, अच्छे लोगों के बीच निवास इत्यादि को जरूरी बताया गया है।

मिशन प्रमुख ने कहा कि सुखी जीवन के लिए आपको योद्धा बनना होगा। योद्धा संघर्षमय जीवन जीता है। मानव जीवन ही वस्तुतः एक संग्राम है। उन्होंने जीवन संघर्षों से कभी नहीं घबराने का आह्वान सभी से किया। उन्होंने अपनों से दो मीठे बोल और तारीफ के शब्दों का मर्म भी समझाया। उन्होंने ब्रह्मर्षि वशिष्ठ द्वारा ऋषि विश्वामित्र की उनकी प्रत्यक्ष अनुपस्थिति में की गई प्रशंसा का जिक्र किया और बताया कि उनके दो अवगुणों ईर्ष्या और क्रोध की चर्चा उस प्रशंसा के दौरान कर देने पर उन पर प्रहार करने आए पेड़ पर छुपे बैठे ऋषि विश्वामित्र ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के चरणों में दंडवत हो गए थे। और, तब उदारमना वशिष्ठ ने विश्वामित्र को चिर प्रतीक्षित ब्रह्मर्षि की पदवी से संबोधित किया था। विश्वामित्र तभी ब्रह्मर्षि बन सके थे क्योंकि देवराज इन्द्र की यह अनिवार्य शर्त थी कि ब्रह्मर्षि वशिष्ठ द्वारा विश्वामित्र की ब्रह्मर्षि स्वीकार करने के बाद ही उन्हें ब्रह्मर्षि घोषित किया जा सकेगा।

आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने आरोग्यता, आर्थिक आत्मनिर्भरता, पारिवारिक प्रसन्नता, सामाजिक प्रतिष्ठा के सूत्र भी सुखी जीवन जीने के लिए सभी को समझाए।

इस विशिष्ठ संगोष्ठी का मंचीय समन्वयन व संचालन विश्व जागृति मिशन नयी दिल्ली निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया।

महाराष्ट्र के उल्हासनगर में विराट अमृत भक्ति सत्संग महोत्सव का हुआ समापन

दुनिया का काम तो आपके बिना चल सकता है लेकिन आपका काम दुनिया के बिना नहीं चल सकता

महाराष्ट्र के उल्हासनगर में श्री सुधांशु जी महाराज बोले

“गणपति मण्डलों के जरिए महाराष्ट्र से उठी थी भारत की स्वतंत्रता क्रान्ति”

”सतनाम सतनाम सतनाम जी वाहे गुरु वाहे गुरु वाहे गुरु जी”

Virat Bhakti Satsang Ulhasnagar-29-01-20उल्लासनगर-मुम्बई, 28 जनवरी (प्रातः)। महाराष्ट्र के ठाणे जनपद के उल्हासनगर महानगर के दशहरा मैदान में बीते पाँच दिनों से चल रहे विराट अमृत भक्ति सत्संग महोत्सव का आज मध्याह्नकाल विधिवत समापन हो गया। विश्व जागृति मिशन नई दिल्ली के उल्हासनगर मण्डल द्वारा आयोजित सत्संग समारोह मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज के नागरिक अभिनन्दन तथा परमपिता परमेश्वर की महाआरती के साथ बड़े धूमधाम एवं भव्य व दिव्य ढंग से सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर विदाई सन्देश देते हुए श्री सुधांशु जी महाराज ने ‘गुरु गीता’ की चर्चा की और उसमें भगवान शिव और माता पार्वती के बीच हुए दिव्य संवाद का सार सुनाया। बताया कि शिव शंकर द्वारा कहा गया था कि दुःखों से सन्तप्त व्यक्तियों तथा पतन-पराभव में फँसे लोगों की सहायता के लिए मैं ‘गुरु’ को माध्यम बनाता हूँ। उन्होंने गुरु महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ब्रह्माण्ड की तीन शक्तियों ब्रह्मा, विष्णु और महेश की चर्चा की और प्रकृति व मानव शरीर की तीन ग्रन्थियों के बारे में विस्तार से बताया।

श्री सुधांशु जी महाराज ने कई प्रसिद्ध गुरुओं व महान शिष्यों का उल्लेख अपने प्रवचन में किया और उस ऊँचाईं के कारक व कारण गिनाए। कहा कि विनम्र बनने से मानव तो क्या परमात्मा तक का प्यार पाया जा सकता है। उन्होंने स्वार्थी भाव छोड़कर परमार्थ भावी बनने तथा दुनिया से खुद को जोड़कर चलने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि यह बात सदैव ध्यान रखनी चाहिए कि ”दुनिया का काम तो आपके बिना चल सकता है लेकिन आपका काम दुनिया के बिना नहीं चल सकता।” उन्होंने सबके हित में अपना हित तलाशने वालों को ईश्वर की विशेष विभूति की संज्ञा दी।

नई दिल्ली से उल्हासनगर आये विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की इसी धरती से बाल गंगाधर तिलक ने भारी संख्या में गणपति मण्डलों का गठन करके स्वाधीनता संग्राम का बिगुल फूंका था। जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत आए तब तक वह आन्दोलन बड़ा प्रखर व विराट स्वरूप अख़्तियार कर चुका था। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को विश्व जागृति मिशन द्वारा संचालित गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी।

मिशन प्रमुख के नागरिक अभिनंदन और महाआरती के साथ सत्संग महोत्सव का समापन हुआ। इसके पूर्व दादा मोहन दास मखीजा ने मिशन मण्डल की ओर से सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। मण्डल प्रधान श्री सुरेश माणिक, उपप्रधान श्री अनिल बदलानी, महामन्त्री श्री गुलशन लुल्ला, कोषाध्यक्ष श्री मनोहर बाधवा और संयुक्त कोषाध्यक्ष श्री अनिल आहूजा ने श्रद्धेय महाराजश्री का नागरिक अभिनंदन किया। इस मौक़े पर उल्हासनगर मण्डल के भूतपूर्व प्रधान श्री भगवान दास आहूजा सहित अनेक गण्यमान व्यक्ति मौजूद रहे।

कृष्ण, गीता, गुरु, योग, ज्ञान, धर्म एवं सत्य की शरण गहें तो हो कल्याण

श्रीमदभगवतगीता मानव के लिए प्राण संजीवनी। सभी ग्रन्थों का पवित्र निचोड़ है गीता

दशहरा मैदान में आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा

महाराष्ट्रवासियों ने किया विजामि प्रमुख का अनूठा अभिनन्दन

”अशरण शरण शान्ति के धाम, एक सहारा तेरा नाम”

उल्हासनगर विराट भक्ति सत्संग महोत्सव शुरू

पावन गायत्री मंत्र के समवेत स्वर उच्चारण से हुआ श्रीगणेश

उल्हासनगर, 24 जनवरी (सायं)। महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई से सटे उल्हासनगर ज़िले के विशालकाय दशहरा मैदान में पाँच दिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का आज अपराह्नकाल विधिवत शुभारम्भ हुआ। विश्व जागृति मिशन के उल्हासनगर मण्डल द्वारा आयोजित सत्संग समारोह का उदघाटन मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर मण्डल के प्रधान श्री सुरेश माणिक, महामंत्री श्री गुलशन गुल्ला, श्री अनिल बदलानी, श्री मनोहर वादवा एवं श्री अनिल आहूजा सहित हजारों की संख्या में ज्ञान जिज्ञासु उपस्थित थे।

गीतोपदेश पर प्रवचन करते हुए श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता मानव मात्र के लिए प्राण संजीवनी है। भारतीय अध्यात्म दर्शन में गीता को सभी धर्म ग्रन्थों का निचोड़ कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। उन्होंने “अशरण शरण शान्ति के धाम-एक सहारा तेरा नाम” के समूह कीर्तन के साथ गीता सन्देश की शुरुआत की और श्रीकृष्ण, गीता, गुरु, योग, ज्ञान, धर्म, सत्य, ध्यान की शरण ग्रहण करने का आहवान सभी से किया। श्री सुधांशु जी महाराज ने सम्बन्ध और सेहत का मूल्य व महत्व सबको समझाया तथा देश-विदेश के कतिपय प्रख्यात व्यक्तियों का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने अति व्यस्त जिन्दगी जीते हुए भी अपनी सेहत एवं वैयक्तिक व सामाजिक सम्बन्धों का सर्वथा ध्यान रखा। उन्होंने उल्हासनगर के हर व्यक्ति को उत्साह एवं उल्लास से भरपूर बनने को कहा।

विश्व जागृति मिशन उल्हासनगर मण्डल के प्रधान श्री सुरेश माणिक ने बताया कि सत्संग महोत्सव 28 जनवरी के मध्यानकाल तक चलेगा। इस बीच 27 जनवरी (सोमवार) की दोपहरी में सैकड़ों स्त्री-पुरुष गुरुदेव श्री सुधांशु जी महाराज से गुरुदीक्षा ग्रहण करेंगे। उन्होंने बताया कि सत्संग समारोह में उल्हासनगर के अलावा ठाणे मण्डल व मुम्बई मण्डल के स्वजन भारी संख्या में भागीदारी कर रहे हैं।

सत्संग महोत्सव मंच का मुख्य समन्वयन व संचालन करते हुए विश्व जागृति मिशन नयी दिल्ली के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने विजामि परिवार द्वारा संचालित आध्यात्मिक एवं रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी और बताया कि रविवार-२६ जनवरी को पूर्वाह्नकाल गणतन्त्र दिवस समारोह सत्संग स्थल पर बड़ी भव्यता व दिव्यता के साथ मनाया जाएगा। आज के उद्घाटन सत्र का समापन दिव्य आरती के साथ हुआ।

वस्तुओं से नहीं व्यक्तियों से प्यार करने की दी आचार्य सुधांशु जी महाराज ने प्रेरणा

चंचल और अस्थिर बुद्धि को छोड़कर स्थिर बुद्धि के स्वामी बनें : सुधांशु महाराज

”तुम मेरे जीवन के धन हो और प्राणधार हो”

पूना विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का दूसरा दिवस

Sudhanshu Ji Maharaj gave inspiration to love people, not objectsपुणे 16 जनवरी (सायं)। विश्व जागृति मिशन द्वारा यहाँ आयोजित पाँच दिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव की दूसरी सन्ध्या पर संस्था प्रमुख श्रद्धेय आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने प्रार्थना की शक्ति, उसकी महत्ता, उसके परिणाम आदि पर चर्चा की और कहा कि स्तुति में हम ईश्वर के गुणों का बखान करके उन गुणों को आत्मसात करने का अभ्यास करते हैं। ईश्वर की ढेरों कृपाओं के लिए धन्यवाद करते हैं। शिकायती बनना छोड़कर धन्यवादी बनने का अभ्यास व्यक्ति को सफ़लताओं के उच्च शिखर पर प्रतिष्ठित कर देता है।

यह उदगार आज सायंकाल पुणे महानगर स्थित गणेश कला क्रीडा रंगमंच सभागार में सत्संग सुनने के लिए हजारों की संख्या में आये ज्ञान-जिज्ञासुओं के बीच प्रवचन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने श्रीमदभगवतगीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा 12वें अध्याय के 8वें श्लोक में दिए गए सन्देश की चर्चा करते हुए कहा कि अपनी बुद्धि को ईश्वर में समाहित करने वाले लोग बड़े सौभाग्यशाली होते हैं। उन्होंने उन सभी आकर्षणों से बचने को कहा जो हमें मोहित करते और बांधते हैं। चंचल यानी अस्थिर बुद्धि की हानियों पर उन्होंने प्रकाश डाला तथा स्थिर बुद्धि का स्वामी बनने की प्रेरणा सभी को दी। कहा कि स्थिर अर्थात एकाग्रता वाली बुद्धि वाले विद्यार्थी ही जीवन की ढेर सारी परीक्षाओं में सफल होते हैं। भटकाव एवं अटकाव के विषय पर श्रद्धेय महाराजश्री का उदबोधन बेहद प्रभावशाली था।

श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि जिस तरह प्रत्येक बीज में विकास की अनेक संभावनाएं होती हैं, उसी प्रकार हर मनुष्य में उच्च अवस्थाओं में प्रतिष्ठित होने की ढेरों संभावनायें विद्यमान हैं। जैसे बीज को वृक्ष बनने एवं फल-फूल तथा अनाज देने के लिए पहले भूमि में गलना पड़ता है, वैसे ही मानव भी बिना गले और बिना ढले कोई सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने गलाई और ढलाई को दैनिक अभ्यास में लाने को कहा। उन्होंने वस्तुओं से नहीं वरन व्यक्तियों से प्रेम करने को कहा।

विश्व जागृति मिशन के पुणे मण्डल के प्रधान श्री घनश्याम झंवर ने बताया कि सत्संग महोत्सव में पुणे सहित महाराष्ट्र के विभिन्न जनपदों के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि प्रान्तों से ज्ञान-जिज्ञासु पुणे आये हुए हैं। उन्होंने बताया कि सत्संग समारोह का समापन 19 जनवरी को अपराह्नकाल होगा।

गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच सभागार में विराट भक्ति सत्संग महोत्सव शुरू

ॐकार का जप-उच्चारण साधक की चेतना को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ता है

विश्व जागृति मिशन के क्रियाकलाप लोक कल्याणकारी हैं

”जीवन की घड़ियाँ बिरथा न खो ॐ जपो हरि ॐ जपो”

प्रमुख अध्यात्मवेत्ता आचार्य श्री सुधांशु जी पुणे पहुँचे

Virat Bhakti Satsang Pune 15-01-2020 | Sudhanshu Ji Maharajपुणे, 15 जनवरी। महाराष्ट्र की विख्यात प्राचीन नगरी पुणे के गणेश कला क्रीड़ा रंगमंच सभागार में पंचदिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव आज अपराह्नकाल विधिवत शुरू हो गया। विश्व जागृति मिशन के पुणे मण्डल के तत्वावधान में आयोजित सत्संग समारोह को सम्बोधित करने संस्था प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज आज दोपहर पुणे पहुँचे। उन्होंने दीप प्रज्जवलित करके पाँच दिनी सत्संग समारोह का श्रीगणेश किया। कार्यक्रम में पुणे सहित महाराष्ट्र के विभिन्न अंचलों से हजारों की संख्या में आए ज्ञान-जिज्ञासु उपस्थित थे। मिशन के पुणे मण्डल के प्रधान श्री घनश्याम झंवर ने महाराजश्री का अभिनंदन किया।

‘ॐ नमः शिवाय’ के सामूहिक संकीर्तन से आरम्भ हुए सत्संग समारोह में आचार्यवर श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि ॐ नाम का संकीर्तन मनुष्य को चिन्ताओं, डरों एवं कषाय-कल्मषों से मुक्त करता है। व्यक्ति अन्दर से बलिष्ठ बनता है और उसमें औदार्य यानी उदारता जैसे ढेरों सद्गुण विकसित होते हैं। उन्होंने खुद के लिए प्रतिदिन थोड़ा समय निकालने की प्रेरणा सबको दी और आन्तरिक क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा।

श्री सुधांशु जी महाराज ने ॐकार की अपरिमित शक्ति की चर्चा करते हुए कहा कि ॐकार का उच्चारण साधक की आत्म चेतना को परम पिता परमात्मा की ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ देता है। यह साधक को एकाकीपन से हटाकर विराट से जोड़ता है, उसके बासीपन को खत्म करके उसे ताजगी से भर देता है। हजारों की संख्या में मौजूद ज्ञान-जिज्ञासुओं को उन्होंने ॐकार का अभ्यास भी कराया।

मिशन प्रमुख ने उत्तरायण पर्व और मकर संक्रांति की बधाई देते हुए सभी सुधीजनों से कहा कि गीता में कुछ श्लोक ऐसे हैं जिनमें भगवान श्रीकृष्ण ने इस लोक को कुछ आदेश दिये हैं और कहा है कि मानव को यदि सुखी रहना है तो यह करना ही है। साधना का मार्ग अपनाना उन आदेशों में एक महत्वपूर्ण आदेश है। उन्होंने कहा कि साधना जीवात्मा की यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग है। श्रद्धेय महाराजश्री ने कहा कि इस जीवन में की गई साधना अगले जन्मों तक को प्रभावित करती है। साधना व्यक्ति के चैतन्य को जागृत करके उसे परम पद से जोड़ती है।

इसके पूर्व विश्व जागृति मिशन मुख्यालय आनन्दधाम नई दिल्ली से पुणे पधारे संस्था के निदेशक श्री राम महेश मिश्र के मंचीय समन्वयन व संचालन में सम्पन्न उदघाटन सत्र में पुणे मण्डल के संगठन मन्त्री श्री रवीन्द्र नाथ द्विवेदी ने संगठन की ओर से उपस्थित जनसमुदाय का अभिनन्दन किया। उन्होंने स्थानीय मण्डल की आध्यात्मिक व प्रचारात्मक गतिविधियों तथा रचनात्मक क्रियाकलापों की जानकारी सभी को दी।

विजामि परिवार पुणे मण्डल के महासचिव श्री विष्णु भगवान अग्रवाल ने बताया कि मन्त्र दीक्षा कार्यक्रम रविवार 19 जनवरी को दोपहर १२.३० बजे सम्पन्न होगा।

बालाश्रम के बाल-योगियों की योग प्रस्तुतियों को देखकर श्रोता हुए अभिभूत

दुनिया के पीछे भागने से दुनिया आपसे दूर भागती है और ईश्वर से जुड़ जाने पर वही दुनिया आपके पीछे दौड़ती है

”प्रभु मेरे जीवन को कुन्दन बना दो, कोई खोट इसमें रहने न पाए”

विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का प्रथम दिवस

विश्व जागृति मिशन के सूरत मण्डल

सूरत, 09 जनवरी (सायं)। विश्व जागृति मिशन के सूरत मण्डल द्वारा यहाँ रामलीला मैदान में आयोजित चार दिनी विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के प्रथम दिवस की सन्ध्या दिव्य भजनों तथा योगासनों की प्रस्तुतियों से सजी थी। नयी दिल्ली स्थित मिशन मुख्यालय आनन्दधाम से आए संगीत दल द्वारा प्रस्तुत भजनों तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय शान्तिकुंज हरिद्वार से उच्च शिक्षा प्राप्त योगाचार्य अतुल कुमार से प्रशिक्षण पाए बालाश्रम के बाल-योगियों की योग प्रस्तुतियों को देखकर समस्त जनमानस भावविभोर हो उठा। इस मौके पर हरिद्वार विश्वविद्यालय के अन्य योगगुरु आचार्य पंकज महाराज भी उपस्थित रहे।

बाल-योगियों एवं उनके योग शिक्षक की सराहना करते हुए मिशन प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि योग विज्ञान इन दिनों पूरे विश्व में अपने पैर पसार रहा है। योग विज्ञान ने युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर प्रदान किये हैं। उन्होंने बालाश्रम की सक्रिय गतिविधियों के लिए स्थानीय विजामि मण्डल प्रधान श्री गोविन्द डांगरा सहित यहाँ के समस्त कार्यकर्ताओं, विशेष रूप से धर्माचार्य आचार्य श्री राम कुमार पाठक के प्रयासों की सराहना की।

श्रीमदभगवदगीता विषय पर आध्यात्मिक सन्देश देते हुए श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि सत्संग, प्रार्थना, भजन, नाम-स्मरण आदि मानव की आत्मा को विशुद्ध बनाते हैं। उन्होंने सत्संग को शान्ति प्रदाता बताया और कहा कि आत्मोद्धार के लिए सत्संग और स्वाध्याय से नियमित रूप से अपने-आपको जोड़े रखना चाहिए। उन्होंने शास्त्र-सम्मत ज्ञान का सम्मान करने का आहवान सभी से किया। आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने गीता सन्देशों को आत्मसात करने की अपील की और कई उद्धरण देते हुए विशेष गीतोपदेश दिया।

मिशन प्रमुख ने कहा कि यह दुनिया बड़ी अजीब है। जब आप इसके पीछे भागते हैं तब यह आपसे दूर चलती जाती है और जब आप दुनिया से भागते हैं तथा ईश्वर से पीछे दौड़ते हैं तब वही दुनिया आपके पीछे दौड़ती है। कहा कि इसलिए समझदार व्यक्ति दुनिया से नहीं बल्कि परम पिता परमात्मा से स्वयं को जुड़ते हैं। जुड़ती दुनिया भी है लेकिन भगवान का प्रिय बनने पर ही वह मनुष्य का यह सम्मान करती है। उन्होंने संघर्षों से नहीं भागने की प्रेरणा उपस्थित जनसमुदाय को दी और कहा कि यह जीवन ही एक संग्राम है, इससे लड़े बिना अर्थात संघर्षों का सामना किये बिना आप सफल नहीं हो सकते। कहा कि आंधियों तथा सर्दी, गर्मी एवं बरसात को झेलने वाले पेड़ ही मज़बूत बनते हैं और सभी के काम आते हैं। श्रद्धेय महाराजश्री ने अनासक्त योग पर भी ज्ञान जिज्ञासुओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने ज़िम्मेदारीपूर्वक कर्तव्य निर्वहन करते हुए उनमें लिप्त नहीं होने के सूत्र सभी को सिखलाए।

गायत्री महामन्त्र के साथ सूर्यनगरी में चार दिनी विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का हुआ आग़ाज़

डर और दुःख के बीच होता है गहरा रिश्ता

अयोग्य व्यक्ति को चापलूसी करनी पड़ती है और योग्य व्यक्ति स्वाभिमानी होता है एवं उसकी हर जगह कद्र होती है

शोभा यात्रा ने मचाई सूरत में विचार क्रान्ति की अद्भुत धूम

Virat Bhakti Satsang Surat 09-1-20 | Sudhanshu Ji Maharajसूरत, 09 जनवरी (प्रातः)। गुजरात प्रान्त की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले सूरत महानगर में 04 दिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का आगाज आज पूर्वाहनकाल गायत्री महामन्त्र के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। नगर के रामलीला प्रांगण में दिव्य भजनों से आरम्भ हुए सत्संग समारोह के पूर्व नगर में विशाल मंगल शोभा यात्रा निकाली गई। दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए सत्संग महोत्सव के मान्य अतिथियों द्वारा आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। सूरत के वेसू स्थित बालाश्रम के विद्यार्थियों के दल ने स्वस्तिवाचन किया। इस मौके पर आचार्यों द्वारा किए गए शंख ध्वनि से पूरा सभागार व प्रांगण गुंजायमान हो उठा।

प्रवचन करते हुए प्रख्यात अध्यात्मवेत्ता आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि डर और दुःख के बीच का रिश्ता बड़ा गहरा होता है। जो डरता है वह दुःख अवश्य पाता है। डरे हुए व्यक्ति से कभी बड़े काम नहीं हुआ करते। बीमारी हो अथवा अन्य कठिनाईयां, उनसे नहीं डरने पर मनुष्य उन पर विजय अवश्य प्राप्त करता है। गीता के उपदेश का उद्धरण देते हुए उन्होंने धार्मिक मनोरंजन की वृत्ति त्यागकर सच्चा आध्यात्मिक व्यक्ति बनने की प्रेरणा सभी को दी। कहा कि चूहे का दिल रखकर शेर का भी शरीर धारण कर लेने से कभी कुछ नहीं मिलता। कहा कि सिंह बनने के लिए अंतरतम को मनोबली बनाना होगा। ऋषि उक्ति ‘वीर भोग्या वसुधंरा’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि यह दुनिया बहादुरों की ही कद्र सदा से करती रही है। उन्होंने कायरता को जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप बताया।

मिशन प्रमुख ने कहा कि श्रीमदभगवतगीता को जीवन में आचरित करने पर व्यक्ति न केवल सुयोग्य बनता है बल्कि वह स्वाभिमानी चरित्र का धनी बनता है। उन्होंने कहा कि अयोग्य लोगों को सक्षम व्यक्तियों की चापलूसी करनी पड़ती है लेकिन योग्य व्यक्ति भीतर से न केवल स्वाभिमानी होते हैं बल्कि उनकी हर जगह कद्र होती है। ऐसे व्यक्तियों को बड़े-बड़े मालिक भी अपने से दूर नहीं करना चाहते। उन्होंने योग्यता को एक ‘देवी सम्पदा’ की संज्ञा दी। आत्मा के स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने बताया कि योग्य व्यक्ति सदैव विनम्र बनते हैं और सभी के प्रिय पात्र बन जाते हैं।

नई दिल्ली से सूरत पहुँचे विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि मिशन के सेवा कार्यक्रमों में अनाथ (देवदूत) बच्चों की शिक्षा एक प्रमुख कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि देवदूत बच्चों का एक स्कूल यहाँ भी कार्यरत है। बालाश्रम सूरत के वरिष्ठ धर्माचार्य आचार्य रामकुमार पाठक ने बताया कि चार दिनी यह सत्संग महोत्सव मुख्य रूप से बालाश्रम में शिक्षा प्राप्त कर रहे देवदूत बालकों की शिक्षा एवं उत्थान के लिए ही समर्पित है। विश्व जागृति मिशन के सूरत मण्डल के प्रधान श्री गोविन्द डांगरा ने बताया कि सत्संग के अन्तिम दिवस मध्यानकाल में सैकड़ों दीक्षार्थी गुरुदेव श्री सुधांशु जी महाराज से मन्त्र दीक्षा ग्रहण करेंगे। इसकी पंजीयन प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है।

आत्म साधना-जीवन साधना पर ध्यान देने वाले बनते हैं सर्वसमर्थ

”समर्थ गुरु के विराट स्वरूप को समझ पाना सहज सम्भव नहीं होता, उसके लिए विशेष प्रयत्न करने की होती है जरूरत”

”साहिब तुम मत भूलियो लाख लोग मिल जाहिं, हम से तुमरे बहुत हैं तुम सम दुसरो नाहिं”

Virat Bhakti Satsang-Nagpur-29-12-19 | Sudhanshu Ji Maharajनागपुर, 29 दिसम्बर (प्रातः)। आज के सत्संग सत्र में प्रख्यात चिन्तक, विचारक, अध्यात्मवेत्ता आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने आंतरिक गाम्भीर्य बढ़ाने के कई आध्यात्मिक फार्मूले उपस्थित जन-समुदाय को बताए और कहा कि आत्म-साधना अर्थात जीवन साधना पर ध्यान देने वाले व्यक्ति न केवल अपना बल्कि सभी का कल्याण करने में समर्थ होते हैं, सफल होते हैं। विश्व जागृति मिशन के नागपुर मण्डल द्वारा आहूत पंचदिवसीय विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के पूर्वाहनकालीन सत्र में मिशन प्रमुख श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि मन का जीवन में बड़ा महत्व है। वह चाहे तो किसी को ऊँचा उठा दे और चाहे तो नीचे गिरा दे। इस मन पर नियंत्रण करने वाले व्यक्ति वास्तव में सौभाग्यशाली होते हैं। इस मन का इलाज गुरु किया करते हैं। उनके ज्ञान की सुगन्ध से लोगों का वैयक्तिक हित तो होता ही है, समूह-मन का भी बड़ा हित होता है। कहा कि गुरु को समझने के लिए भी बड़ी ईश कृपा की जरूरत पड़ती है। अधिकांश शिष्य गुरु के विराट स्वरूप को समझ नहीं पाते, जैसे अर्जुन ब्रह्मस्वरूप गुरु अर्थात श्रीकृष्ण को समझ नहीं पाया था। उसे समझाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को विशेष ईश-संरक्षण अर्जुन को प्रदान करना पड़ा था।

आनन्दधाम नई दिल्ली से आये विश्व जागृति मिशन के धर्मादा अधिकारी श्री जीसी जोशी ने बताया कि संस्था द्वारा अनाथाश्रम सेवा, गुरुकुल सेवा, वृद्धाश्रम सेवा, करुणा सिन्धु धर्मार्थ अस्पताल सेवा, गौशाला सेवा, भंडारा सेवा, देव मन्दिर सेवा, यज्ञ सेवा एवं सत्संग आदि सेवायें राष्ट्रीय स्तर पर संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि सत्संग स्थल पर इन धर्मादा सेवाओं से जुड़े स्टॉल लगाकर उनसे लोगों को जोड़ा जा रहा है। युगऋषि आयुर्वेद हेल्थकेयर फ़ाउण्डेशन नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री के.के.जैन ने रोज़गारोन्मुख इस योजना के बारे में जानकारी दी और बताया 150 से अधिक आयुर्वेदिक उत्पाद सिडकुल हरिद्वार में तैयार करवाकर देश भर में पहुँचाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये उत्पाद लोगों को विभिन्न बीमारियों से बचाने में भारी योगदान दे रहे हैं। युगऋषि आयुर्वेद की ई.सर्विस के प्रभारी श्री संकल्प सोलंकी ने अपने प्रभाग की बहुआयामी सेवाओं से सभी को अवगत कराया।

विश्व जागृति मिशन निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने बाताया कि नागपुर सत्संग महोत्सव में मिशन मुख्यालय नई दिल्ली के अलावा देश के अन्य कई मण्डलों के अधिकारी भी यहाँ पहुँचे, जिनमें श्री मनोज शास्त्री, श्री रवीन्द्र गांधी, श्री ललित राय, श्री राजेन्द्र भारती एवं श्री यशपाल सचदेव शामिल हैं।

मानव जीवन में परीक्षा प्रकृति की एक अनिवार्य व्यवस्था है

नागपुर में श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा

सुबह शाम ईश्वर को थैंक्स कहना ही प्रार्थना है

विराट भक्ति सत्संग महोत्सव का तीसरा दिवस

Virat Bhakti Satsang-Nagpur-27-12-19 | Sudhanshu Ji Maharajनागपुर, 27 दिसम्बर (सायं)। महाराष्ट्र की उप राजधानी कहे जाने वाले नागपुर के रेशमबाग में आज सन्ध्याकाल प्रख्यात अध्यात्मवेत्ता आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि परीक्षा हर किसी को देनी पड़ती है, चाहे वह एक बच्चा हो या कोई बूढ़ा व्यक्ति। जो परीक्षा से घबराते हैं वे अपनी जिंदगी में पिछड़ जाते हैं। परीक्षा मानव जीवन की एक प्राकृतिक एवं अनिवार्य व्यवस्था है। उन्होंने सभी से जीवन की विविध परीक्षाओं के लिए धैर्यपूर्वक हमेशा तैयार रहने को कहा।

श्रीमद्भभगवदगीता की सन्देश श्रृंखला के क्रम में आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने गीता के 11वें अध्याय के 36वें श्लोक की चर्चा करते हुए उसमें अर्जुन और गीतानायक भगवान श्रीकृष्ण के बीच के संवाद की चर्चा की और कहा कि अर्जुन कहता है कि हे माधव! आपकी यशोगाथा न केवल यह धरती बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एवं समस्त प्रकृति करती है। इतिहास के अनुपम गुरु-शिष्य अर्थात कृष्ण-अर्जुन के मध्य की चर्चाओं का विवेचन करते हुए उन्होंने ‘शिकायती नहीं धन्यवादी’ बनने का आह्वान सभी से किया। कहा कि सदैव शिकायत करते रहने वाले व्यक्ति जीवन में कभी सफल नहीं होते, सुखी नहीं रहते।

मनुष्य में व्याप्त ‘आत्म-तत्व’ की महत्ता पर चर्चा करते हुए आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने मानव को शक्ति और संभावनाओं का पुंज बताया। कहा कि उसे प्रयासपूर्वक पहचानना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने विशेष मन्त्र-सूत्र समझाए और उनका विवेचन किया। उन्होंने आज मध्यानकाल में नागपुर के सूराबर्डी स्थित दिव्य निर्मल धाम आश्रम में कतिपय नए निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। उल्लेखनीय है कि इस आश्रम में विशाल सत्संग भवन, विशाल सिद्ध शिखर, राम सेतु, द्वादश ज्योतिर्लिंग, गुफा मन्दिर, नव दुर्गा मन्दिर, वैष्णव माता मन्दिर स्थित है। इस केन्द्र के दर्शन करने हजारों व्यक्ति पहुँचते हैं। वृहद् विजामि परिवार के आचार्य शिवदत्त मिश्र के आध्यात्मिक नेतृत्व में यह आश्रम कुशलतापूर्वक सेवारत है।

रेशमबाग में आज की संध्या प्रेरणादायी भजनों से सजी हुई थी। श्री कश्मीरी लाल चुग, महेश सैनी, राम बिहारी एवं आचार्य अनिल झा द्वारा गाये गए गीतों से सभी ने प्रेरणा ली। संगीत दल में वादक के रूप में श्री राहुल आनन्द, रामनिधि, सौरभ एवं बापूराव सम्मिलित थे।

विश्व जागृति मिशन मुख्यालय आनन्दधाम नई दिल्ली से आये स्टॉल प्रभारी श्री प्रयाग शास्त्री ने बताया कि सत्संग सभा स्थल पर लगभग एक दर्जन स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें साहित्य, वृद्धजन सेवा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा सेवा, गौ सेवा, कैलाश यात्रा, अनाथ शिक्षा सेवा, धर्मादा सेवा, गुरुकुल आदि के स्टॉल शामिल हैं।

स्वांस-प्रश्वांस का सन्तुलन स्वस्थ जीवन का मूल मन्त्र

आप रथी औऱ शरीर रथ तथा इन्द्रियाँ घोड़ें, आप कुशल रथी बनिये और सही दिशा में बढ़ जाईये

विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के प्रातःकालीन सत्र में ज्ञान-जिज्ञासुओं को ध्यान की गहराई में उतारा गया

Virat Bhakti Satsang-Nagpur-27-12-2019 | Sudhanshu Ji Maharajनागपुर, 27 दिसम्बर (प्रातः)। आप रथी हैं, यह शरीर रथ है, लगाम बुद्धि (मन) के हाथ में है और शरीर की इन्द्रियाँ घोड़ें हैं। ये इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों की ओर भागती हैं और रथ को तथा रथी को मानवीय जीवन के शाश्वत गंतव्य तक न पहुँचाकर इधर-उधर भटका देती है और रथी यानी आपको इस सुर-दुर्लभ काया में आने के उद्देश्य से दिग्भ्रमित कर देती हैं।

यह उदगार आज यहाँ रेशमबाग स्थित विशालकाय प्रांगण में 25 दिसम्बर से चल रहे विश्व जागृति मिशन के सत्संग समारोह में संस्था प्रमुख आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि ये इन्द्रियाँ मानव की बुद्धि पर नशा चढ़ा देती है। यह नशा अनेक स्रोतों से आता है, जिनमें जवानी, खानदान-कुल, रंग जवानी, रूप, धन, पद आदि का नशा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये रथी सदा-सर्वदा सफल होते हैं जो अपने जीवन रथ का सारथी अर्जुन की भाँति परमेश्वर को बना लेते हैं। जिस रथ का सारथी परमात्मा है, वह रथ कभी भी दिशा नहीं भटक सकता। अतः रथ की लगाम परमात्मा का अंश ‘आत्मा’ के हाथ में पकड़ाएं, मन के हाथ में नहीं।

आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने आज के पूर्वाहनकालीन सत्र में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित स्त्री-पुरुषों को जीवन की सफलता के लिए ध्यान को जरूरी बताया। उन्होंने ध्यान की सरल विधियाँ सभी को सिखलायीं। उन्होंने ध्यान एवं योगासन की क्रियाओं में स्वांस-प्रश्वांस को ज़रूरी बताया तथा देशवासियों का आह्वान किया कि वे प्रतिदिन अपने लिए कुछ समय अवश्य निकाला करें। आपके द्वारा ख़ुद की की गई यह सेवा वास्तव में देश की बड़ी सेवा होगी।

विश्व जागृति मिशन के नागपुर मण्डल के महामन्त्री श्री दिलीप मुरारका ने बताया कि कल रेशमबाग स्थित कविवर्य सुरेश भट्ट सभागृह में ‘गुरु मन्त्र सिद्धि साधना’ के विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। अतएव 28 दिसम्बर का पूर्वाहनकालीन सत्र सत्संग हॉल के स्थान पर सुरेश भट्ट आडिटोरियम में सम्पन्न होगा। मिशन निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने बताया कि नागपुर सत्संग महोत्सव में महाराष्ट्र के अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि प्रान्तों के ज्ञान-जिज्ञासु भाग ले रहे हैं।